Class 9 Hindi Ganga Chapter 4 Aisi bhi Baaten hoti hai (ऐसी भी बातें होती हैं) NCERT Question and Answer

रचना से संवाद
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर: (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
तर्क: साक्षात्कार में लता जी ने स्पष्ट रूप से कहा है, “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा… उन्होंने जो संस्कार दिए उससे जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली।”
2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर: (घ) कर्तव्यनिष्ठा।
तर्क: उन्होंने अपने परिवार की ज़िम्मेदारी को सर्वोपरि माना। वे कहती हैं, “हमेशा यही बात दिमाग में घूमती थी कि किसी तरह बस मुझे अपने परिवार को देखना है… किस तरह मैं अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सकती हूँ।” यह उनके दृढ़ कर्तव्यबोध को दर्शाता है।
3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर: (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
तर्क: नई बहू के घर आने पर आस-पड़ोस की औरतों का एकत्र होना, गीत गाना और नाचना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज में सामाजिक जुड़ने और उत्सव मनाने का मुख्य माध्यम संगीत ही रहा है।
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर: (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क: लता जी स्वयं इसका अर्थ बताती हैं, “गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।” अर्थात् शरीर नश्वर है, परंतु इंसान के श्रेष्ठ कर्म और उसका नाम दुनिया में हमेशा अमर रहता है।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर: (ग) आत्मीय।
तर्क: लता जी बताती हैं कि “जितनी भी लड़कियाँ थीं, वो बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं। सबका ही घर में आना-जाना होता था।” वे उनके साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं, जो उनके गहरे आत्मीय संबंधों को दर्शाता है।
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर: (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्क: वे कहती हैं, “मैं यह मानती हूँ कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह जरूर रच देता है।”
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर: (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।
तर्क: पूरे संवाद में वे अपने काम (संगीत) के प्रति पूर्णतः समर्पित नज़र आती हैं। अपार सफलता के बावजूद उनमें अहंकार नहीं है (सादगी), और उन्होंने अपने पिता से स्वाभिमान के साथ जीना सीखा है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे?
उत्तर: यह प्रसंग दर्शाता है कि उनके पिताजी बच्चों को शारीरिक दंड या कटु वचनों से नहीं डराते थे। केवल उनकी गंभीर दृष्टि और एक प्रश्न (“समझ गए न?”) ही बच्चों को उनकी गलती का अहसास कराने के लिए पर्याप्त था। गलती का अहसास होते ही वे उन्हें वापस खेलने भेज देते थे, जो उनके गहरे स्नेह को दर्शाता है। यह अनुशासन और प्रेम का एक आदर्श संतुलन है।
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: लता जी पर उनके पिताजी के स्वाभिमान, सच्चाई और संगीत के प्रति एकाग्रता का गहरा प्रभाव पड़ा। पिताजी से ही उन्होंने सीखा कि कठिन परिस्थितियों में भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना है और जो बात सही लगे, उसी पर अडिग रहना है। संगीत की बारीकियों (जैसे एक राग से दूसरे राग में जाना) के प्रति उनकी समझ भी पिताजी की ही देन है।
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर: ‘नाम आगे बढ़ाने’ का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है। लता जी के लिए इसका अर्थ है— अपने पिताजी के सिखाए गए नैतिक मूल्यों (स्वाभिमान, सरलता, कला के प्रति समर्पण) को जीवन भर निभाना। यह एक बड़ा उत्तरदायित्व था कि वे अपने आचरण और अपनी महान कला से अपने पिता और परिवार के गौरव को पूरे विश्व में स्थापित करें।
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: लता जी के संबंध अपने सहयोगियों (कोरस गाने वाली लड़कियों और संगीतकारों) के साथ अत्यंत मधुर, आत्मीय और पारिवारिक थे। वे कोरस वाली लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं और उनके पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होती थीं। इसी तरह, दीवाली पर वे खुद जाकर अपने वरिष्ठ संगीतकारों को मिठाई देती थीं, जो उनके सम्मान और जुड़ाव को दिखाता है।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व/उभरती छवि
साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए-
(दिए गए गुण: दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान)
1. “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
- उत्तर: एकाग्रता, समर्पण, साधना।
2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
- उत्तर: स्वाभिमान, दृढ़ता, आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता।
3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
- उत्तर: विनम्रता, सरलता, कृतज्ञता।
4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
- उत्तर: दार्शनिकता, स्पष्टवादिता।
मेरे प्रश्न
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)-
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
प्रश्न 1: नई बहू के घर आने पर मनाए जाने वाले ‘मंगलागौर’ पर्व की क्या विशेषताएँ थीं?
प्रश्न 2: भारतीय समाज के लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच कौन-से भाव झलकते हैं?
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
प्रश्न 1: पुराने संगीतकारों की सादगी और उनकी कला के विषय में लता जी के क्या विचार थे?
प्रश्न 2: तकनीकी विकास और पुराने संगीतकारों के काम की तुलना करते हुए लता जी ने क्या निष्कर्ष निकाला?
मेरे अनुभव मेरे विचार (आदर्श छात्र उत्तर)
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
उत्तर: हाँ, एक बार कक्षा में कुछ छात्र मिलकर एक कमज़ोर विद्यार्थी का मज़ाक उड़ा रहे थे। मेरे दोस्तों ने भी उनका साथ दिया। लेकिन मुझे यह सही नहीं लगा, इसलिए मैं अकेला उन सबके खिलाफ खड़ा हुआ और मैंने शिक्षक से इसकी शिकायत की। सच्चाई का साथ देने के कारण मुझे किसी के आगे झुकना नहीं पड़ा।
2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
उत्तर: मेरे परिवार में यह नियम है कि घर से बाहर जाते समय और वापस आने पर घर के बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। साथ ही, भोजन करने से पहले भगवान का धन्यवाद करना चाहिए। ये बातें मेरे संस्कारों में बस गई हैं और मैं बिना किसी के याद दिलाए इनका पालन करता हूँ।
3. “पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर: हम अपने घर में ‘दीपावली’ का पर्व बहुत विशेष तरीके से मनाते हैं। दीपावली से कई दिन पहले घर की सफाई होती है। त्योहार वाले दिन हम मिट्टी के दीये जलाते हैं, घर के बाहर रंगोली बनाते हैं, और पड़ोसियों व रिश्तेदारों को अपने हाथ से बनी मिठाइयाँ बाँटकर खुशियाँ साझा करते हैं।
4. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं?
उत्तर: पहले त्योहारों पर घर की औरतें स्वयं मिलकर मिठाइयाँ बनाती थीं और लोकगीत गाती थीं। अब लोग बाज़ार से रेडिमेड मिठाइयाँ लाते हैं और डी.जे. (DJ) पर संगीत बजाते हैं। आपसी मेलजोल कम हो गया है और त्योहारों का रूप अब अधिक दिखावटी और व्यावसायिक (commercial) हो गया है।
विधा से संवाद – साक्षात्कार की पड़ताल
1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम: यतींद्र मिश्र (साक्षात्कारकर्ता), लता मंगेशकर (साक्षात्कार देने वाली)।
प्रश्नोत्तर: यतींद्र मिश्र : दीदी, आपके संगीत की… लता मंगेशकर : जी, जरूर।
भावनात्मक वातावरण: “आपके संगीत के प्रति दीवानगी की हद तक समर्पित श्रोताओं…”
आमंत्रण, स्वागत और परिचय: “आपका बेहद शुक्रिया कि आपका ऐसा कुछ करने का मन है।”
उत्तर देने की शैली का संकेत: (हँसते हुए), (खिलखिलाकर हँसती हैं)।
विचार और उदाहरण: “एक बार बड़ा मजेदार वाकया हुआ कि मैं नौशाद साहब के घर सुबह करीब साढ़े पाँच बजे पहुँच गई…”
संस्मरण: “मुझे याद है कि प्रभात फिल्म कंपनी की एक पिक्चर थी ‘संत तुकाराम’…”
समापन: “आज मुझे लगता है कि हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया…”
2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है- क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर: यह कथन स्पष्ट करता है कि यह एक ‘आत्मीय बातचीत’ है। लता जी इसमें किसी प्रकार का अहंकार या औपचारिकता (Formality) नहीं दिखा रही हैं। वे एक बड़ी बहन (दीदी) की तरह बहुत ही सहजता और सरलता से अपने जीवन के निजी और गहरे अनुभवों को साझा करने के लिए तैयार हैं।
आपका साक्षात्कार
कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
उत्तर: मैं उनसे पूछता- “दीदी, जब लगातार काम करने या संघर्ष के कारण आप मानसिक रूप से थक जाती थीं, तो खुद को दोबारा कैसे प्रेरित (Motivate) करती थीं?” यह प्रश्न मैं इसलिए पूछता ताकि आज की युवा पीढ़ी उनसे विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने का गुण सीख सके।
विषयों से संवाद
1. उस समय महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?
उत्तर: मात्र 13 वर्ष की आयु में लता जी का दिन बहुत संघर्षपूर्ण रहा होगा। उन्हें सुबह जल्दी उठकर लोकल ट्रेन या बस की भीड़ में सफर करना पड़ता होगा। सामाजिक तानों (लड़कियों का फिल्मों में काम करना) को नज़रअंदाज़ करते हुए उन्हें पूरा दिन कई-कई घंटों तक बिना ठीक से खाए-पिए खड़े रहकर रिहर्सल करनी पड़ती होगी। उनकी सबसे बड़ी चुनौती अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवार के लिए पैसे कमाना रही होगी।
2. अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिसमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर: विद्यालय के ‘वार्षिकोत्सव’ (Annual Function) में, मोहल्ले में ‘स्वच्छता अभियान’ चलाने में, और घर में किसी बड़े ‘विवाह समारोह’ के आयोजन में हमेशा सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है। बिना एक-दूसरे के सहयोग के ये कार्य सफल नहीं हो सकते।
शास्त्रीय संगीत
1. शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए- राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, फाग, बधावा
राग: संगीत में स्वरों का वह विशिष्ट और नियमबद्ध क्रम जो कानों को मधुर लगे और मन को प्रसन्न करे। (उदाहरण: राग यमन, राग भैरवी)
सुर (स्वर): संगीत की मूल ध्वनि जो कानों को स्पष्ट सुनाई दे। (सा, रे, ग, म, प, ध, नि)
बंदिश: शास्त्रीय संगीत में कविता या गीत के बोल जिन्हें किसी विशेष राग और ताल में बाँधा गया हो।
अभंग: महाराष्ट्र में ईश्वर (विशेषकर भगवान विट्ठल) की स्तुति में गाया जाने वाला भक्ति काव्य। (जैसे- संत तुकाराम के अभंग)
सोहर: घर में पुत्र/पुत्री के जन्म के शुभ अवसर पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला मांगलिक लोकगीत।
फाग: फाल्गुन मास (होली) के अवसर पर गाया जाने वाला उल्लासपूर्ण लोकगीत।
बधावा: किसी भी शुभ कार्य, त्योहार या मांगलिक अवसर पर दी जाने वाली बधाई का गीत।
2. अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: (छात्र अपने क्षेत्र का लोकगीत लिख सकते हैं। उदाहरणार्थ होली का फाग:)“होरी खेलत हैं गिरधारी, सखि री! होरी खेलत हैं गिरधारी… कहाँ से आए रंग और गुलाल, कहाँ से आई पिचकारी…”
साइबर सुरक्षा
कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता/AI द्वारा आवाज़ बदलकर ठगी) से किस प्रकार बचा जा सकता है?
उत्तर: AI वॉइस क्लोनिंग से बचने के लिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
यदि कोई परिचित फोन पर इमरजेंसी बताकर पैसे माँगे, तो तुरंत पैसे भेजने के बजाय उन्हें वापस कॉल (Cross-verify) करके पुष्टि करें।
अपने परिवार में एक ‘सुरक्षा कोड’ (Secret Word) तय करें, जिसे संकट के समय पूछा जा सके।
सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी और ऑडियो/वीडियो को ‘पब्लिक’ न रखें।
अनजान लिंक्स पर क्लिक न करें और किसी के भी साथ अपना OTP (वन टाइम पासवर्ड) साझा न करें।
हम ऐसे भी बोलते हैं
1. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, मेरी माता जी बिना कुछ बोले केवल अपनी नज़रों से मुझे सब समझा देती हैं। जब मेहमान घर पर आते हैं और मैं कोई शरारत करता हूँ, तो उनकी एक गंभीर नज़र देखते ही मैं शांत होकर बैठ जाता हूँ।
2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
उत्तर: मैं बहुत ही धैर्य (Patience) और सहानुभूति के साथ उनकी बात समझने का प्रयास करूँगा। मैं उनसे आँखें मिलाकर बात करूँगा और आवश्यकता पड़ने पर लिखकर या अपने संकेतों के माध्यम से उनकी सहायता करूँगा। मैं उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दूँगा कि वे अलग या कमज़ोर हैं।
सृजन
1. “अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ”… लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए।
उत्तर:दिनांक: 15 अगस्त 1949आज मेरे जीवन का सबसे अद्भुत दिन था! मैं टाइम मशीन से 1949 के बॉम्बे (मुंबई) पहुँचा और युवा लता दीदी से मिला। आज मैंने उन्हें ‘महल’ फिल्म के गाने ‘आएगा आने वाला’ की रिहर्सल करते देखा। स्टूडियो में आज जैसी आधुनिक मशीनें नहीं थीं। दीदी ने एक साधारण सूती साड़ी पहनी हुई थी और उनके चेहरे पर एक गज़ब का तेज था। माइक तक आवाज़ का प्रभाव लाने के लिए उन्हें कमरे के एक कोने से गाते हुए धीरे-धीरे माइक की तरफ आना पड़ रहा था। लंच में हमने टिफिन से सादा दाल-रोटी और सब्ज़ी खाई। उनकी सादगी, बिना किसी थकान के लगातार मेहनत करना और संगीत के प्रति उनका जुनून देखकर मैं नतमस्तक हो गया।
2. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है— आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर: आदरणीय दीदी, आपकी आवाज़ केवल कुछ गीत नहीं हैं, वे हमारे देश की धड़कन हैं। आपने सही कहा कि शरीर अमर नहीं है, लेकिन जो सुर आपने हवाओं में घोल दिए हैं, वे ब्रह्मांड के अंत तक गूँजते रहेंगे। आपका जीवन हमें सिखाता है कि किस प्रकार सादगी और स्वाभिमान के साथ सर्वोच्च शिखर को छुआ जा सकता है। आप हमारी स्मृतियों में, हमारे सुबह के भजनों में और रातों की लोरी में हमेशा जीवित रहेंगी। आपको भावभीनी श्रद्धांजलि!
भाषा से संवाद – व्याकरण की बात
‘हाथ’ से जुड़े मुहावरे और उनके वाक्य प्रयोग:
हाथ में आना (प्राप्त होना): बरसों की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार सफलता उसके हाथ में आ ही गई।
हाथ का मैल होना (तुच्छ वस्तु होना): विद्वान लोगों के लिए पैसा तो बस हाथ का मैल होता है, वे ज्ञान को महत्व देते हैं।
हाथ से हाथ मिलाना (सहयोग करना): कठिन समय में हमें एक-दूसरे से हाथ से हाथ मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए।
हाथ साफ करना (चुरा लेना): भीड़ का फायदा उठाकर चोर ने महिला के पर्स पर हाथ साफ कर दिया।
हाथ से निकल जाना (नियंत्रण से बाहर होना): अत्यधिक लाड़-प्यार के कारण बिगड़ैल बच्चा माता-पिता के हाथ से निकल गया।
हाथ धो बैठना (गँवा देना): अपनी छोटी-सी लापरवाही के कारण रमेश अपनी अच्छी-खासी नौकरी से हाथ धो बैठा।
हमारी भाषाएँ
1. इस कहावत (“गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन”) के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर: (बुंदेली/स्थानीय भाषा का उदाहरण): “गौंव तो बह गओ, पन नांव रै गओ।” (अर्थात् इंसान तो चला जाता है, पर उसका नाम पीछे रह जाता है।)
2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर: मातृभाषा (भोजपुरी) की कहावत: “अन्हरा गुरु, बहिर चेला, माँगे गुड़ त देवे ढेला।”हिंदी अनुवाद: जब गुरु अंधा (ज्ञानहीन) हो और शिष्य बहरा (बात न सुनने वाला) हो, तो गुड़ माँगने पर पत्थर का टुकड़ा ही मिलता है।भाव में परिवर्तन: अनुवाद करने से कहावत का शाब्दिक अर्थ तो स्पष्ट हो गया, लेकिन मातृभाषा के शब्दों में जो क्षेत्रीय मिठास और व्यंग्य का प्रभाव था, वह हिंदी अनुवाद में थोड़ा कम हो गया।
3. एक ‘सेतु चित्र’ बनाइए जिसमें दो किनारे हों- एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
उत्तर: (छात्र चित्र बनाएँ)[किनारा 1: हिंदी] ———— [किनारा 2: मराठी/स्थानीय भाषा]समान शब्द: जल (पाणी/जल), हवा (वारा/हवा), सूर्य (सूरज/सूर्य), माता (आई/माता), घर (घर/मकान)।
गतिविधियाँ
(छात्र निर्देशानुसार कक्षा में पोस्टर निर्माण, भाषा-वृक्ष, समाचार बुलेटिन और कोलाज बनाने का कार्य शिक्षकों के मार्गदर्शन में पूर्ण करेंगे।)
भाषा संगम
उपर्युक्त वाक्य (“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”) को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
- उत्तर: (उदाहरणार्थ पंजाबी में:) “उस दिन घर विच संगीत दी महफिल हुंदी सी।” (छात्र इसे अपनी स्थानीय भाषा में लिख सकते हैं।)
खोजबीन
1. “जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे।” पता कीजिए कि उन्होंने जीवन-भर में कौन-कौन से ‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त किए?
उत्तर: लता मंगेशकर जी को उनके जीवनकाल में कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं:
भारत रत्न (देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान – 2001)
पद्म विभूषण (1999)
पद्म भूषण (1969)
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1989)
फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Legion of Honour – 2007)
तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवार्ड्स।
2. इंटरनेट की सहायता से इनमें से किसी एक फिल्म और गीत को देखकर उसके विषय में अपने विचार लिखिए। आपको यह फिल्म और गीत कैसा लगा और क्यों?
उत्तर: मैंने फिल्म ‘महल’ (1949) का गीत ‘आएगा आने वाला’ इंटरनेट पर देखा। यह एक बहुत ही रहस्यमयी (Suspenseful) और मधुर गीत है। लता जी की युवा आवाज़ में जो ठहराव और गूँज (Echo) है, वह सीधे दिल को छूती है। बिना आधुनिक तकनीक के भी इस गीत में जो प्रभाव पैदा किया गया है, वह अद्भुत है। यह गीत मुझे बहुत पसंद आया क्योंकि इसकी धुन आज भी ताज़ा और सुकून देने वाली लगती है।
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