Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon ki Katha Question and Answer

Here ia the complete NCERT Exercise for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon ki Katha.

रचना से संवाद

Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon ki Katha
Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon ki Katha

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता

(ख) एकता और सहयोग

(ग) गर्व और दंभ

(घ) विद्रोह और क्रोध

उत्तर: (ख) एकता और सहयोग

तर्क: पूरी कहानी में, चाहे वे हल में जुते हों, साँड़ से लड़े हों, या काँजीहौस में कैद हों, वे हमेशा एकजुट रहे और एक-दूसरे का साथ दिया।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

तर्क: बैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें बिना किसी कारण के बेच दिया है, जो उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और दुःखद था।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए

(घ) अपनापन पाने के लिए

उत्तर: (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

तर्क: गया के घर में वे पराधीन महसूस कर रहे थे और उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने स्वतंत्र होने का निर्णय लिया।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान

(ख) अहिंसा

(ग) पराधीनता

(घ) अन्याय की रक्षा

उत्तर: (क) स्वाभिमान

तर्क: अकारण मार खाना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता था, जो उनके स्वाभिमान का प्रतीक है।

5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

तर्क: लेखक यह दर्शाना चाहते थे कि पशुओं में भी संवेदना, विचार करने की क्षमता और चेतना होती है।

6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

तर्क: जिस प्रकार हीरा और मोती बार-बार अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष करते हैं, उसी प्रकार भारतीय जनता ने भी स्वतंत्रता के लिए अथक संघर्ष किया था।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तर: बैलों को लगा कि उनके मालिक झूरी ने उन्हें बेच दिया है। अपना घर छूटने का उन्हें बहुत दुःख था। यह नया घर, नया गाँव और नए आदमी उन्हें बेगानों से लगते थे, इसीलिए आहत भावना के कारण उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया था।

2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

उत्तर: पशुओं का इतनी दूर से, बिना मार्ग जाने, मजबूत रस्सियाँ तोड़कर वापस आना कोई साधारण घटना नहीं थी। यह उनके दृढ़ निश्चय, असीम प्रेम और स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा को दर्शाता था, इसीलिए गाँव के बच्चों ने उनका तालियाँ बजाकर स्वागत किया और इसे महत्वपूर्ण माना।

3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तर: कहानी में कई बार यह बात सामने आती है। उदाहरण के लिए, जब विशाल साँड़ सामने आया तो उन्होंने हार मानने के बजाय एक साथ मिलकर उससे संघर्ष किया। इसी तरह, काँजीहौस में बंद होने पर अपनी और अन्य कमज़ोर जानवरों की जान बचाने के लिए दीवार तोड़ना भी आवश्यक संघर्ष का ही उदाहरण है।

4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तर: वे ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे। काँजीहौस और दढ़ियल से आज़ाद होने के बाद उनके पास भागकर कहीं भी जाने का अवसर था, लेकिन वे सीधे अपने मालिक झूरी के घर अपने ‘थान’ पर पहुँचे क्योंकि वे उसके प्यार और अपनेपन के भूखे थे।

5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। यदि अत्याचार चुपचाप सहा जाए, तो अत्याचारी का मनोबल बढ़ता है और वह आगे भी अन्याय करता है। गया द्वारा अकारण पीटे जाने पर पाँव न उठाना और हल तोड़कर भागना यह दर्शाता है कि अन्याय का विरोध करना आवश्यक है।

6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर: 1. नाँद में दोनों एक साथ मुँह डालते थे और एक के हटा लेने पर दूसरा भी मुँह हटा लेता था।2. साँड़ के हमले के समय दोनों ने मिलकर उसे हराया और एक-दूसरे की जान बचाई।3. काँजीहौस में जब हीरा बँधा था, तो अवसर मिलने पर भी मोती उसे छोड़कर नहीं भागा और वहीं सो गया।

7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तर: मालकिन का व्यवहार आरंभ में कठोर और क्रोधी था; उसने बैलों को ‘नमक-हराम’ कहा और उन्हें सिर्फ सूखा भूसा देने का आदेश दिया। इसके विपरीत, छोटी लड़की का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील और प्रेमपूर्ण था; वह सौतेली माँ से मार खाने के डर के बावजूद बैलों को रोटियाँ खिलाती थी। हालाँकि, अंत में मालकिन का हृदय भी प्रेम से पिघल गया।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होती, तो मैं भी चुपके से उनके पगहे खोल देती ताकि वे भाग सकें। इसके अलावा, मैं कोशिश करती कि किसी तरह उनके लिए थोड़े और चारे या रोटियों की व्यवस्था कर दूँ ताकि उन्हें रास्ते में भूख न लगे।

2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। काँजीहौस की दीवार टूटने के बावजूद गधे केवल इस भय से नहीं भागे कि वे फिर पकड़े जाएँगे और उन्हें मार पड़ेगी। वास्तविक जीवन में भी कई बार असफलता या जोखिम के डर (भय) से लोग जीवन में आगे बढ़ने के सुनहरे अवसर गँवा देते हैं और उसी दयनीय स्थिति में पड़े रहते हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है. जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। जब दोस्ती गहरी होती है, तो उसमें औपचारिकताएँ (formalities) खत्म हो जाती हैं। दोस्तों के बीच हंसी-मज़ाक, हल्का-फुल्का मार-पीट (धौल-धप्पा) और रूठना-मनाना इस बात का सूचक है कि वे एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं। मेरे अनुभव में भी मेरे सबसे करीबी मित्र वे ही हैं जिनके साथ मैं बिना कुछ सोचे बेझिझक मज़ाक कर सकता हूँ।

2. “हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तर: मेरा विचार इस संबंध में हीरा के अधिक निकट है। मैं हीरा के साथ हूँ। किसी भी युद्ध या संघर्ष में नैतिकता का होना आवश्यक है। यदि दुश्मन निहत्था हो गया है या गिर गया है, तो उस पर वार करना कायरता और अमानवीयता है।

3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर: (छात्र अपना अनुभव स्वयं लिखें।

उदाहरण स्वरूप: हाँ, एक बार भारी बारिश में मैं और मेरा मित्र स्कूल से लौटते समय बाढ़ जैसे पानी में फँस गए थे। तब हमने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर सहारा दिया और धैर्यपूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुँचे। हमने एक-दूसरे को अकेले नहीं छोड़ा।

विधा से संवाद – कहानी की पड़ताल

आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-

बिंदुविवरण
शीर्षक और लेखकदो बैलों की कथा, मुंशी प्रेमचंद
विषयजानवरों के प्रति मानवीय संवेदना और स्वतंत्रता का मूल्य
परिवेश/देश-काल और मुख्य चरित्र/पात्रस्वतंत्रता पूर्व का भारतीय गाँव। मुख्य पात्र: हीरा, मोती, झूरी, गया, छोटी लड़की, दढ़ियल।
विचारआज़ादी सहज नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है।
क्रिया/कार्यबैलों का गया के घर से भागना, साँड़ से लड़ना, काँजीहौस की दीवार तोड़ना।
परिणामसभी कष्टों को पार कर दोनों मित्रों का सुरक्षित अपने मालिक के घर लौट आना।

कहानी का सौंदर्य

नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-

विशेषताविशेषता का अर्थउदाहरण 1उदाहरण 2 (छात्रों के लिए)
चित्रात्मक भाषाशब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना।घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे।
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग।मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।हीरा ने मूक-भाषा में कहा- “भागना व्यर्थ है।” मोती ने उत्तर दिया- “तुम्हारी तो इसने जान ही ले ली थी।”
विरोधाभासएक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना।झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।गधा सचमुच बेवकूफ है, या उसके सीधेपन ने उसे यह पदवी दे दी है।
व्यंग्यवह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष के माध्यम से किसी दोष को प्रकट किया जाता है।भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।लेकिन गधे का एक छोटा भाई और भी है… ‘बछिया के ताऊ’।
संघर्षदो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना।उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़)मोती का काँजीहौस की दीवार में सींग मारकर मिट्टी गिराना और चौकीदार से मार खाना।
अतिशयोक्तिकिसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव लगे।झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।साँड़ पूरा हाथी है।
संदेह/उलझनजब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता।सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है?दोनों गधे अभी तक खड़े सोच रहे थे कि भागें या न भागें।

कहानी की रचना

प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/ बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर: कहानी के आरंभ में गधे और बैल के स्वभाव पर की गई चर्चा यह संकेत देती है कि कहानी जानवरों (विशेषकर बैलों) के इर्द-गिर्द घूमेगी। साथ ही, भारतीयों की अफ्रीका में दुर्दशा का जिक्र इस बात का संकेत है कि कहानी परोक्ष रूप से पराधीनता और स्वतंत्रता के संघर्ष से जुड़ी हुई है।

विषयों से संवाद – कहानी का समय और समाज

इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-

कहानी में से वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।

पशुओं के लिए कानून

1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

उत्तर: न्याय इस दृष्टि से है कि वे भटकते हुए लावारिस की तरह खेत चर रहे थे, जिससे किसान का नुकसान हो रहा था; नियमतः ऐसे पशुओं को काँजीहौस भेजा जाता है। अन्याय इस दृष्टि से है कि काँजीहौस में उन्हें कई दिनों तक चारा-पानी तक नहीं दिया गया, जो अमानवीय और पशु-क्रूरता है।

2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

उत्तर: मैं पशुओं के लिए भरपेट भोजन व स्वच्छ पानी का अधिकार, बीमारी में चिकित्सा पाने का अधिकार, और अकारण मारपीट या क्रूरता से बचने के लिए ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ के तहत अधिकार माँगूंगा।

3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

थानाध्यक्ष महोदय,

काँजीहौस क्षेत्र।

विषय: पशुओं के साथ हुए अन्याय और क्रूरता की शिकायत।

महोदय,

हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी के बैल हैं। हमारे साथ घोर अन्याय हुआ है। खेत में भटक जाने पर हमें पकड़कर काँजीहौस में बंद कर दिया गया। वहाँ एक सप्ताह तक हमें चारे का एक तिनका नहीं दिया गया, जिससे हम अधमरे हो गए। इसके बाद हमें कसाई को नीलाम कर दिया गया। यह हमारे अधिकारों का हनन है। कृपया इस कृत्य के लिए संबंधित व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करें।

धन्यवाद।

प्रार्थी:

हीरा और मोती

हमारी धरोहर और संस्कृति

1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

उत्तर: वे निहत्थे या गिरे हुए दुश्मन पर कभी सींग नहीं चलाते थे। वे औरत जात (महिलाओं) पर वार करना अपने धर्म के विरुद्ध मानते थे। साथ ही, वे अपने मालिक के प्रति नमकहरामी नहीं करते थे।

2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

उत्तर: ये कथन उन उच्च भारतीय नैतिक मूल्यों की ओर संकेत करते हैं जहाँ युद्ध में भी धर्म और नीति का पालन किया जाता है, जैसे निहत्थे या पराजित शत्रु पर वार न करना, और भारतीय समाज में स्त्रियों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान व सुरक्षा।

3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता” (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर: * पारंपरिक उपकरण: फावड़ा (मिट्टी खोदने के लिए), खुरपी (निराई-गुड़ाई के लिए), रहट (सिंचाई के लिए)।

आधुनिक उपकरण: ट्रैक्टर (जुताई के लिए), हार्वेस्टर (फसल काटने के लिए), थ्रेशर (अनाज अलग करने के लिए)।

(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

उत्तर: बैल खेतों में हल चलाने, कुएँ से पानी खींचने (पुर चलाने), कोल्हू चलाकर तेल निकालने, और बैलगाड़ी के माध्यम से माल व इंसानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के काम आते हैं।

अलग-अलग और साथ-साथ

1. “दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।” कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: * हीरा: सहनशील, धैर्यवान, समझदार, शांत स्वभाव वाला और दूरदर्शी था।

मोती: आक्रामक, गुस्सैल, साहसी, उतावला, और विद्रोही स्वभाव का था।

2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

उत्तर: दोनों स्वतंत्रता प्रेमी और सच्चे मित्र थे, यह उनकी समानता थी। उनकी भिन्नता ऐसे काम आती थी कि जब मोती गुस्से में कोई गलत कदम (जैसे गाड़ी खाई में गिराना) उठाने लगता, तो हीरा अपने धैर्य से उसे संभाल लेता। वहीं, जब अत्यधिक साहस और बल की आवश्यकता होती (जैसे साँड़ से लड़ना या दीवार तोड़ना), तो मोती का उग्र रूप दोनों के काम आता था।

3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

उत्तर: (यह छात्र गतिविधि है। संभावित उत्तर:) मैं चाहता हूँ कि मेरे सहपाठी मेरी भिन्नताओं का सम्मान करें और मुश्किल विषयों में मेरी मदद करें। उनसे पूछने पर पता चला कि वे भी यही चाहते हैं कि खेल-कूद या पढ़ाई में हम एक-दूसरे की कमियों का मज़ाक उड़ाने के बजाय एक-दूसरे के पूरक बनें।

4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।” कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

उत्तर: वे एक-दूसरे को देखकर अपनी आँखों के भावों से, सींग हिलाकर, धीरे-धीरे हुँकार भरकर, या एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर अपने मन की बात एक-दूसरे तक पहुँचाते होंगे।

5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर: परीक्षा भवन में जब बोलना मना होता है तो हम इशारों से बात करते हैं। दूर खड़े मित्र को बुलाने के लिए हाथ हिलाकर इशारा करते हैं। नाराज़गी जताने के लिए मुँह फेर लेना भी मूक संवाद का ही हिस्सा है।

मार्ग खोजेंगे कैसे?

1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

उत्तर: (छात्र अपना अनुभव लिखें) हाँ, एक बार मैं मेले की भीड़ में रास्ता भटक गया था। तब मैंने घबराने के बजाय एक पुलिस वाले अंकल को अपने माता-पिता का फोन नंबर बताया, और उन्होंने उन्हें बुला लिया।

2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।

उत्तर: उसे सड़क पर लगे दिशा-सूचक बोर्ड (Signboards) पढ़ने चाहिए, आस-पास की दुकानों के बोर्ड से पते का अंदाज़ा लगाना चाहिए, और स्मार्टफ़ोन हो तो ऑनलाइन मानचित्र (जैसे Google Maps) का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, पुलिस या किसी विश्वसनीय सरकारी भवन में जाकर मदद माँगनी चाहिए।

3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

उत्तर: (यह एक प्रायोगिक गतिविधि है जो छात्रों को स्वयं अपने विद्यालय में करनी है।)

सृजन

1. हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।

उत्तर:

आज का दिन… बहुत ही बुरा और डरावना रहा। गया से भागकर जब हम आज़ाद महसूस कर ही रहे थे कि मटर के खेत में रखवालों ने पकड़ लिया। शाम को हमें इस काँजीहौस में बंद कर दिया गया है। यहाँ का दृश्य बहुत भयानक है; कितने ही जानवर भूख से मुरदों की तरह ज़मीन पर पड़े हैं। हमारे पेट भी भूख से जल रहे हैं। गुस्सा आ रहा है, लेकिन मुझे हीरा/मोती पर भरोसा है कि हम जल्द ही यहाँ से भाग निकलने का कोई रास्ता ढूँढ़ लेंगे।

2. मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।

उत्तर:

दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ: कई जानवरों को दी नई ज़िंदगी!

स्थानीय संवाददाता द्वारा

कल देर रात काँजीहौस में एक हैरतअंगेज़ घटना घटी। झूरी नामक किसान के दो बैल, जिन्हें हाल ही में यहाँ लाया गया था, ने काँजीहौस की पक्की-कच्ची दीवार को अपने सींगों से मार-मारकर गिरा दिया। इसके परिणामस्वरूप अंदर कैद भैंसें, घोड़ियाँ और बकरियाँ आज़ाद होकर भाग गईं। आश्चर्य की बात यह है कि उन बैलों में से एक (मोती) भाग सकता था, लेकिन अपने बंधे हुए साथी (हीरा) के प्रेम में वह भी वहीं रुका रहा। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

3. यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।

उत्तर: > नया अंत: यदि बैल दढ़ियल के चंगुल से छूटकर वापस न आ पाते, तो संभवतः वे कसाई के हाथों मारे जाते और उनकी हड्डियाँ व सींग बाज़ार में बिक जाते। झूरी हमेशा उनकी प्रतीक्षा करता रहता और उनकी याद में दुखी रहता। गया और झूरी की पत्नी को बाद में अपनी कठोरता पर गहरा पछतावा होता, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती।

4. नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।

उत्तर: (दिए गए चित्रों के आधार पर)

चित्र 1 (काँजीहौस में कैद): मोती: “मुझे तो मालूम होता है प्राण निकल रहे हैं।”हीरा: “इतनी जल्द हिम्मत न हारो भाई।”

चित्र 2 (दीवार तोड़ना): हीरा: “मैं जोर लगाता हूँ, यह दीवार कच्ची है।”

चित्र 3 (जानवरों का भागना): मोती: “तुम सब भाग जाओ, अब तुम आज़ाद हो।”

भाषा से संवाद – मेरे शब्द

कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

उत्तर:

विषाद: अनुमान- दुःख | शब्दकोश- उदासी, अवसाद।

पराकाष्ठा: अनुमान- बहुत ऊँचाई | शब्दकोश- अंतिम सीमा, चरम कोटि।

गोईं: अनुमान- जोड़ी | शब्दकोश- खेल का साथी या ढोर (पशु) बाँधने की रस्सी/जोड़ी।

पगहा: अनुमान- रस्सी | शब्दकोश- फंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है।

टिटकार: अनुमान- आवाज़ | शब्दकोश- ‘टिक-टिक’ शब्द करके घोड़े/बैल को चलने के लिए प्रेरित करना।

भाषा गढ़ते मुहावरे

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-

1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”

  • वाक्य: अकेले इस भारी अलमारी को दूसरी मंजिल पर पहुँचाने में मज़दूरों को दाँतों पसीना आ गया।

2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”

  • वाक्य: रात के अंधेरे में भयानक आवाज़ सुनकर मेरा दिल काँप उठा।

3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”

  • वाक्य: मेरी नई गाड़ी देखकर पड़ोसियों की आँखों में जलन थी और वे जल उठे।

4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”

  • वाक्य: अपनी बेइज़्ज़ती पर वह कुछ बोल न सका, बस मन-ही-मन ऐंठकर रह गया।

5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”

  • वाक्य: अगर तुमने फिर से मुझे परेशान किया, तो मैं तुम्हारी अच्छी खबर लूँगा।

6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”

  • वाक्य (जी तोड़कर काम करना): किसान फसल उगाने के लिए जी तोड़कर काम करते हैं।
  • वाक्य (गम खा जाना): बड़ों की डाँट सुनकर समझदार बच्चे गम खा जाते हैं।

7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”

  • वाक्य: भारतीय सेना ने बॉर्डर पर शत्रुओं को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।

8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”

  • वाक्य: पुलिस की गाड़ी सायरन बजाते आती देख सारे चोर नौ-दो ग्यारह हो गए।

गतिविधियाँ

1. (क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।

उत्तर:ओ गाँव के प्यारे वीरो, ओ हीरा और मोती।तुम्हारी पक्की दोस्ती की, जगमगा रही है ज्योति।तुमने तोड़ी ज़ालिम की रस्सी, साँड़ को भी पछाड़ा।तुम्हारे साहस से गूंज रहा है, गाँव का हर अखाड़ा।

(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।

उत्तर: अभिनंदन-पत्रहम, बाल-सभा के सभी सदस्य, गाँव के गौरव ‘हीरा’ और ‘मोती’ का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। आपने अपने अद्भुत साहस, एकता और अटूट मित्रता से न केवल अपने सम्मान की रक्षा की, बल्कि काँजीहौस के बेज़ुबान जानवरों की जान बचाकर महान परोपकार भी किया है। आपका घर वापस लौटना हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।

2. मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- ‘पशुओं के अधिकार’। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:आदरणीय सभापति एवं मेरे मित्रों! आज हम यहाँ हीरा और मोती का स्वागत करने एकत्र हुए हैं। इन दोनों बैलों ने हमें सिखाया है कि पशुओं के भी अधिकार होते हैं और उनमें भी संवेदनाएँ होती हैं। क्या पशुओं का काम सिर्फ हमारा बोझ ढोना है? नहीं! उन्हें भी भरपेट भोजन, आराम और प्यार का अधिकार है। उन पर अकारण लाठी बरसाना अमानवीय है। हमें पशुओं के प्रति क्रूरता बंद कर उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। धन्यवाद।

3. इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

उत्तर: भाग 1: गया के घर का कष्ट और अपमानभाग 2: भागने की कोशिश और बालिका का प्रेमभाग 3: आज़ादी और साँड़ से लड़ाईभाग 4: काँजीहौस की कैद और दीवार तोड़नाभाग 5: दढ़ियल से छुटकारा और घर वापसी

मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों- हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी

उत्तर:

(हीरा): “सहनशीलता है मेरी पहचान, मोती का हूँ मैं साथी महान। बताओ मैं कौन?”

(झूरी): “बैलों से मैं करता हूँ प्यार, मेरे ही घर है उनका संसार। बताओ मैं कौन?”

(मोती): “गुस्सा मेरी नाक पर रहता, अन्याय मैं कभी न सहता। बताओ मैं कौन?”

(गया): “साला हूँ मैं झूरी का, बैलों से कराता हूँ मज़दूरी। बताओ मैं कौन?”

(बैल): “खेतों में मैं हल चलाता, गाड़ी में भी जोता जाता। बताओ मैं कौन?”

(मटर): “हरे रंग का हूँ मैं दाना, भागकर बैलों ने मुझे था खाया। बताओ मैं कौन?”

(रस्सी): “गले में बाँधी जाती हूँ, झटके से टूट जाती हूँ। बताओ मैं कौन?”

(रोटी): “छोटी बच्ची मुझे थी लाती, भूखे बैलों की भूख मिटाती। बताओ मैं कौन?”

भाषा संगम

इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बैल’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर: अंग्रेजी में: Bull / Ox. (अन्य भाषाएँ छात्र अपनी जानकारी अनुसार लिख सकते हैं।)

• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर: (उदाहरण स्वरूप, वाक्य “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है” को राजस्थानी में:) “कदी-कदी अड़ियल बैल भी दीख जावे है।” (छात्र अपनी मातृभाषा के अनुसार इसे बदल सकते हैं।)

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